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जद यू कार्यालय में उदासीनता, बिहार के राजनीतिक पखवाड़े पर चर्चा, कल क्या होगा??

जदयू ऑफिस में सियासी हलचल तेज, निशांत कुमार और वरिष्ठ नेताओं से हुई खास मुलाक़ात.
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जदयू ऑफिस में सियासी हलचल तेज, निशांत कुमार और वरिष्ठ नेताओं से हुई खास मुलाक़ात.

✍️ सैयद आसिफ इमाम काकवी
आज जद (यू) के पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में गुज़रा हुआ लम्हा मेरे लिए सिर्फ़ एक मुलाक़ात नहीं था.बल्कि एक ऐसी रूहानी और सियासी कड़ी थी, जिसने दिल और सोच दोनों को झकझोर कर रख दिया। मेरी मुलाक़ात आज श्री निशांत कुमार से हुई और ये कहना गलत नहीं होगा कि ये मुलाक़ात एक नई दिशा, एक नई जिम्मेदारी और एक नई उम्मीद की शुरुआत बन गई। निशांत जी की शख़्सियत में एक अजीब सी सादगी है, लेकिन उसी सादगी के पीछे एक गहरी सोच, एक साफ़ नज़र और बिहार के मुस्तक़बिल के लिए एक मुकम्मल विज़न छुपा हुआ है। जब उन्होंने मुझसे बात की, तो वो सिर्फ़ एक नेता की तरह नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान की तरह बात कर रहे थे, जो सच में बिहार को बेहतर देखना चाहता है। उन्होंने मुझे (सैयद आसिफ इमाम काकवी) से खुलकर अपनी सोच साझा की। पार्टी की विचारधारा, उसके उसूल, और बिहार के विकास को लेकर उनकी जो ख्वाहिश है, वो साफ़ झलक रही थी। उन्होंने कहा कि सियासत सिर्फ़ सत्ता का खेल नहीं होनी चाहिए, बल्कि ये समाज को जोड़ने, लोगों को साथ लेकर चलने और हर तबके तक इंसाफ़ पहुंचाने का ज़रिया बननी चाहिए। उनकी बातों में एक दर्द भी था बिहार के लिए, उसके नौजवानों के लिए, उसकी तरक्की के लिए और साथ ही एक उम्मीद भी थी कि अगर सही लोग, सही नीयत के साथ आगे आएं, तो बिहार फिर से एक नई मिसाल बन सकता है। उन्होंने मुझसे ये भी कहा कि आप जैसे लोगों को पार्टी के साथ जुड़कर, अपने अनुभव और अपनी लेखनी से समाज को जागरूक करना चाहिए और पार्टी को मार्गदर्शन देना चाहिए। ये अल्फ़ाज़ मेरे लिए सिर्फ़ एक सलाह नहीं थे, बल्कि एक भरोसा था एक जिम्मेदारी थी, जिसे मैं दिल से महसूस कर रहा हूं। इसी दौरान जब माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के इस्तीफ़े की खबर आई, तो माहौल अचानक बदल गया। लेकिन उस माहौल में भी एक चीज़ साफ़ थी नीतीश कुमार सिर्फ़ एक नाम नहीं हैं, वो एक एहसास हैं। नीतीश नहीं सिर्फ़ नाम एक एहसास ये सिर्फ़ एक जुमला नहीं, बल्कि बिहार की सच्चाई है। इस्तीफ़े के बाद भी जद (यू) के कार्यकर्ताओं, नेताओं और आम लोगों के दिलों में जो भरोसा है, वो इस बात का सबूत है कि नीतीश कुमार ने सिर्फ़ शासन नहीं किया, बल्कि दिलों पर हुकूमत की है। बिहार की सोच आज भी उसी रास्ते पर खड़ी है जहां विकास हो, जहां शिक्षा हो, जहां हर तबके को बराबरी का हक़ मिले, और जहां सियासत का मतलब सेवा हो।
निशांत कुमार की बातों में भी वही सोच झलकती है एक ऐसा बिहार, जहां नौजवानों को मौके मिलें, जहां महिलाओं को सम्मान मिले, जहां हर इंसान को उसकी पहचान और उसका हक़ मिले। आज की इस मुलाक़ात ने मुझे ये एहसास दिलाया कि जद (यू) सिर्फ़ एक पार्टी नहीं है ये एक सोच है, एक मिशन है, और एक ऐसा रास्ता है जो बिहार को एक नई ऊंचाई तक ले जाने का सपना देखता है।
मेरे लिए ये दिन बेहद खास रहा क्योंकि आज मुझे सिर्फ़ सुनने का मौका नहीं मिला, बल्कि समझने का भी मौका मिला और शायद कहीं न कहीं, एक नई जिम्मेदारी को अपनाने का भी। में दिल से यही कहना चाहूंगा नीतीश कुमार एक नाम नहीं एक एहसास हैं
आज पटना की सरज़मीं पर गुज़रा हुआ दिन किसी आम सियासी दिन की तरह नहीं था। ये एक ऐसा लम्हा था, जिसमें सियासत के साथ-साथ जज़्बात भी थे, मोहब्बत भी थी, भरोसा भी था और एक नई शुरुआत की हल्की सी दस्तक भी। जद (यू) प्रदेश कार्यालय की फिज़ा आज कुछ बदली-बदली सी थी हर चेहरा संजीदा था, लेकिन आंखों में उम्मीद की चमक भी साफ़ दिखाई दे रही थी। मेरी मुलाक़ात आज श्री निशांत कुमार से हुई एक ऐसी शख़्सियत, जिनकी सादगी में गहराई है और जिनकी सोच में बिहार के मुस्तक़बिल की एक साफ़ और रोशन तस्वीर दिखाई देती है। उनसे हुई बातचीत महज़ औपचारिकता नहीं थी, बल्कि दिल से दिल तक पहुंचने वाली एक सच्ची गुफ़्तगू थी। उस बातचीत के बाद ये एहसास और भी मज़बूत हो गया कि आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी के मार्गदर्शन में पार्टी सिर्फ़ आगे नहीं बढ़ रही, बल्कि एक सोच, एक विज़न और एक मिशन के साथ आगे बढ़ रही है जहां सियासत का मतलब सिर्फ़ सत्ता नहीं, बल्कि सेवा है। इसी दौरान प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय श्री उमेश सिंह कुशवाहा जी से मुलाक़ात हुई और ये मुलाक़ात मेरे लिए बेहद खास रही। उनका सादा मिज़ाज, अपनापन और मेरे काम के प्रति उनका सम्मान ये सब दिल को छू गया। उन्होंने जिस अंदाज़ में मुझे पार्टी की विचारधारा, मिशन और विज़न के बारे में बताया, वो एक नई जिम्मेदारी का एहसास दिलाने वाला था। उन्होंने मुझे पार्टी से जुड़ने, अपने अनुभव को युवाओं तक पहुंचाने और बिहार के लिए कुछ ठोस करने के लिए प्रेरित किया ये मेरे लिए किसी सम्मान से कम नहीं था। विधान पार्षद सह मुख्य सचेतक श्री संजय कुमार सिंह ‘गांधी जी उपनेता श्री ललन कुमार सर्राफ, और कई वरिष्ठ नेताओं, जिलाध्यक्षों व प्रखंड अध्यक्षों से मुलाक़ात ने इस दिन को और भी यादगार बना दिया। हर एक के लफ़्ज़ों में एक ही जज़्बा था संगठन, समर्पण और सेवा।
लेकिन इस दिन की सबसे गहरी छाप तब दिल पर पड़ी, जब मैंने जद (यू) के वरिष्ठ नेता आदरणीय श्री वशिष्ठ नारायण सिंह “दादा” से मुलाक़ात की। उनका अनुभव, उनकी सोच और उनकी दुआएं ये सब कुछ ऐसा था जिसने मेरे अंदर एक नई रौशनी भर दी। उन्होंने मेरी लेखनी को सराहा, मेरे विचारों को सुना और मुझे पार्टी में आने का न्योता दिया। उनका ये कहना बिहार को आप जैसे लोगों की ज़रूरत है ये अल्फ़ाज़ मेरे लिए सिर्फ़ हौसला नहीं थे, बल्कि एक जिम्मेदारी बन गए। उन्होंने मुझे पार्टी कार्यालय आते रहने, अपने अनुभव साझा करने और युवा नेतृत्व के साथ मिलकर काम करने की ताकीद की ये लम्हा मेरी ज़िंदगी के सबसे खास लम्हों में शामिल हो गया। आज की ये सारी मुलाक़ातें सिर्फ़ औपचारिक परिचय नहीं थीं ये रिश्तों की बुनियाद थीं, जहां सियासत से ऊपर इंसानियत, मोहब्बत और भरोसे की बात होती है। लेकिन इसी बीच जब माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के इस्तीफ़े की खबर सामने आई, तो पूरा माहौल एकदम बदल गया। जद (यू) कार्यालय में जो जज़्बात उभरे, वो शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। सादिक अख़्तर और नजम इक़बाल जैसे जमीनी नेताओं की आंखों से आंसू बह निकले ये आंसू किसी हार के नहीं थे, बल्कि एक ऐसे रहनुमा के लिए मोहब्बत और एहतराम के थे, जिसने बिहार को एक नई पहचान दी। उनकी आवाज़ में दर्द भी था और फख्र भी नीतीश कुमार सिर्फ़ एक नाम नहीं एक एहसास हैं, एक भरोसा हैं, हर दिल की आवाज़ हैं। कुछ लोग कहते हैं नीतीश युग खत्म हो गया लेकिन हकीकत ये है युग खत्म नहीं होते, वो लोगों के दिलों में ज़िंदा रहते हैं। नीतीश कुमार एक सियासत नहीं, एक तहज़ीब हैं एक सोच हैं एक ऐसा रास्ता हैं जो आने वाली नस्लों को भी राह दिखाएगा। और इसी सियासी और जज़्बाती माहौल के बीच मेरी मुलाक़ात जद (यू) की वरिष्ठ नेत्री, “ऑल इंडिया महिला की आवाज़ शगुफ़्ता परवीन से हुई। ये मुलाक़ात इस पूरे दिन का सबसे प्रेरणादायक हिस्सा बन गई।शगुफ़्ता परवीन सिर्फ़ एक नाम नहीं हैं वो एक आवाज़ हैं, जो बिहार की हर उस महिला की नुमाइंदगी करती है, जो अपने हक़ के लिए खड़ी होना चाहती है। उनकी आवाज़ में वो ताक़त है, जो सीधे दिल तक पहुंचती है, और उनकी शख़्सियत में वो मजबूती है, जो हर मुश्किल को आसान बना देती है। प्रदेश अध्यक्ष श्री उमेश सिंह कुशवाहा जी ने जब मुझे उनसे मिलवाया और उनके 15 वर्षों के संघर्ष और समर्पण के बारे में बताया, तो दिल में एक फख्र का एहसास हुआ। और जब सादिक अख़्तर साहब ने कहा
शगुफ़्ता परवीन का सफर पार्टी के लिए एक मिसाल है तो ये उनके किरदार की सच्ची तस्वीर थी।
एक मुस्लिम महिला होकर, अपने दम पर अपनी पहचान बनाना और सियासत के इस मुश्किल मैदान में मजबूती से खड़े रहना ये किसी जंग से कम नहीं। लेकिन शगुफ़्ता परवीन ने इस जंग को जीतकर दिखाया है। आज की ये मुलाक़ात मेरे लिए एक सीख भी थी और एक प्रेरणा भी कि सियासत सिर्फ़ कुर्सी की नहीं होती ये जुनून की होती है ये वफ़ादारी की होती है और ये उन लोगों की होती है, जो बिना रुके, बिना थके, अपने मक़सद के लिए खड़े रहते हैं। आज का दिन मेरे लिए बेहद खास भी रहा और कहीं न कहीं एक कसक भी छोड़ गया
लेकिन इस कसक के साथ एक नई उम्मीद भी पैदा हुई है कि शायद ये अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। क्योंकि सच यही है कुछ चेहरे कुर्सी छोड़ देते हैं लेकिन दिलों से कभी नहीं उतरते और बिहार आज भी यही कह रहा है ये सियासत नहीं ये मोहब्बत है।

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