सम्बन्धित समाचार के लिये इसमे दिये गए लिंक पर क्लिक करें।http://www.mpnn.in ओंकार तिवारी✍️ इस अध्याय की पहली पंक्ति मैं अनुपम मिश्र जी के शब्दों से शुरू करना चाहता हूँ, जो उन्होंने अपनी अमर कृति “तैरने वाला समाज डूब रहा है” में लिखे थे। उनका कहना था — जो समाज कभी पानी में तैरना जानता था, नावें बनाना जानता था, बाढ़ के साथ जीना जानता था, वही समाज आज डूब रहा है — पानी से नहीं, अपनी भूली हुई समझ से। बाढ़ पहले भी आती थी, तब वह उत्सव थी; अब आती है तो आपदा है। पानी वही है, नदी वही है — बदले हम हैं। अनुपम जी कहा करते थे — “बाढ़ अतिथि नहीं है। यह हर साल आती है, लगभग तय समय पर। अतिथि के लिए हम तैयारी नहीं करते, पर जो हर साल तय समय पर आए, उसके साथ तो रहना सीखना ही होगा।” और यह भी — “हमने अपनी जेब फाड़ रखी है। करोड़ों का संसाधन बरसता है, और हम उसे ‘निपटाने’ का तरीक़ा ढूँढ़ लेते हैं। निपटाना नहीं, साथ रहना सीखना होगा।” यह अध्याय इसी एक शब्द-परिवर्तन की कथा है — नियंत्रण से प्रबंधन तक। नियंत्रण में अहंकार है — कि हम नदी से बड़े हैं। प्रबंधन में विनय है — कि नदी हमसे पुरानी है, हमें उसकी लय समझकर अपनी व्यवस्था…
सम्बन्धित समाचार देखने के लिए इसमे दिये गये लिंक पर क्लिक करें। http://www.mpnn.in 21 साल की हुकूमत, फिर भी बेख़ौफ़ जुर्म आख़िर बिहार को अम्न का सवेरा कब नसीब होगा? ✍️ सैय्यद आसिफ़ इमाम काकवी बिहार एक ऐसी सरज़मीन है जिसने दुनिया को इल्म दिया, तहज़ीब दी, सियासत को नई दिशा दी और इतिहास के सुनहरे…
सम्बन्धित समाचार के लिए इसमे दिय्ये गये लिंक पर क्लिक करें।http://www.mpnn.in एस. ज़ेड. मलिक जबकि – एक गहन शोध से पता चलता है कि एक महिला संसार की परम्परागत पहली जन्मजात शिक्षिका होती है। बेटी के रूप में जन्म लेती है, बहन बनती है फिर बहु बनती है फिर अंत मे माँ बनती है। परन्तु…
संबंधित लेख समाचार, देखने के लिए इसमे दिये गये लिंक पर क्लिक करें – http://www.mpnn.in दलितों पिछड़ों आदिवासियों और अल्पसंख्यको इसे ध्यान से पढ़ो और एक बार 5 मिंट का समय निकाल कर इस पर मंथन करो। संविधान संशोधन क्यूँ? – एस. ज़ेड. मलिक अपने आपको दलित पिछड़े कहलवाने वालों एक ध्यानपूर्वक संविधान पर मंथन करो…
संबंधित समाचारों के लिए यहां दिए गए लिंक पर क्लिक करें। http://www.mpnn.in चुनौतियों से परिपूर्ण मिस यूनिवर्स महिला सशक्तिकरण का एक प्रेरणादायक प्रतीक है। मिस यूनिवर्स बनने के लिए अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं के दौरान यौन उत्पीड़न से लेकर महिलाओं के लिए उपलब्ध कानूनी उपाय, डेटिंग ऐप्स से जुड़ी नकल और चुनौतियां, घरेलू हिंसा, कानूनों में आवश्यक बदलाव…
सम्बन्धित खबरों के लिए इसमे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।http://www.mpnn.in राज्यसभा में बिहार की सशक्त आवाज़ – डॉ धर्मशीला गुप्ता एआईएनजी//अमित (स्वतंत्र पत्रकार) नई दिल्ली – बिहार से राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित भाजपा नेता डॉ. धर्मशीला गुप्ता ने अपने संसदीय कार्यकाल के शुरुआती दौर में ही महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक न्याय,…
सम्बन्धित समाचार के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👉🏽http://www.mpnn.in कोचिंग संस्कृति के चौराहे पर शिक्ष अंततः प्रश्न किसी एक पत्रकार, एक यूट्यूबर शिक्षक या किसी विशेष संस्थान का नहीं है। वास्तविक मुद्दा शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण और उस मानसिकता का है जिसमें सफलता को एक उत्पाद की तरह बेचा जाने लगा है। शिक्षा का…
संबंधित समाचार के लिये दिये गए लिंक पर क्लिक करें – http://www.mpnn.in हिंदी पत्रकारिता भारतीय समाज का एक दर्पण है – लोकतंत्र की चौथी स्तंभ। एस. ज़ेड. मलिक हर साल 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस साहस और जिम्मेदारी का उत्सव है जो हर…
संबंधित खबरों के लिए दिये गए लिंक पर क्लिक करें।http://www.mann.in उर्दू अदब का आफ़ताब डूब गया बशीर बद्र के इंतिकाल से ग़ज़लों की दुनिया सूनी” एआईएन//सैयद आसिफइमाम काकवी ईद-उल-अज़हा की पुरनूर फिज़ाओं में जब हर तरफ़ तकबीरों की सदाएं गूंज रही थीं, मस्जिदों और ईदगाहों में रौनक थी, बच्चों के चेहरों पर मुस्कुराहट थी और…
अन्य खबरों के लिए इसमे दिय्ये गये लिंक पर क्लिक करें।http://www.mpnn.in एआईएन/संवादाता नई दिल्ली : देश के प्रधानमंत्री द्वारा आरंभ की गई ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के साथ कदम ताल करते हुए बाल भारती पब्लिक स्कूलों की शीर्षस्थ संस्था, चाइल्ड एजुकेशन सोसायटी (सीईएस) द्वारा, प्रतिवर्ष, कल्याणकारी पहल के रूप में, एक माह तक चलने वाले…
