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शिक्षा एनक्लेव – जाएं तो जाएं कहां – न्याय कौन करेगा?

शिक्षा एन्क्लेव सहकारी आवास समिति के अध्यक्ष और सचिव द्वारा करोड़ों का घपला

शिक्षा एन्क्लेव सहकारी समिति के अध्यक्ष और सचिव द्वारा करोड़ों का घपला

एआई न्यूज़/ब्योरो
गाज़ियाबाद – पिछले दिनों गाज़ियाबाद के जिला समाहरणालय में शिक्षा एन्क्लेव सहकारी आवास समिति, जीएच -11,सैक्टर नं 6, वसुंधरा गाजियाबाद के अध्यक्ष एवं सचिव द्वारा आवासीय परिसर के निवासियो का बिल्डिंग बनने के बाद से अब तक रजिस्ट्री और मेन्टेन्स के नाम पर करोड़ों रुपये लिये जा चुके हैं बावजूद फिर से अब रजिस्ट्री के नाम पर अभी और 6, 40000 पर आवासीय और भी मानेगा जा रहा जो सरासर गलत है, दुबारा फिर रजिस्ट्री के नाम पर ठगने प्लान किया जा रहा ऐसा मामला अभी प्रकाश में आया। 
जबकि शिक्षा एनक्लेव का मूल भूखण्ड की अभी तक रजिस्ट्री नही हुई है, जिस समय उक्त भूखण्ड की रजिस्ट्री के नाम पर 22 लाख उपभोक्ताओं से ले कर अध्यक्ष और सचिव ने वसूल कर हज़म कर लिया, और तो और 70 फ्लैटों को क़ब्ज़ा देने के लिये पर फ्लैट  22 लाख कुछ हज़ार पहले ही वसूला जा चुका था, परन्तु अब फिर से वसूलने की तैयारी चल रही है यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब शिक्षा एनक्लेव के कुछ लोग गाज़ियाबाद समाहरणालय में समिति के अध्यक्ष और सचिव के नाम के विरुद्ध डीएम को एक शिकायत पत्र देने आए उस शिकायत पत्र का ब्यौरा इस प्रकार है । नीचे देखिये। 
दिनांक : 28-08-2025
सेवा में
श्री रवीन्द्र कुमार मंदार, आईएएस 
जिलाधिकारी,
उप जिलाधिकारी (सिटी)
राज नगर, हापुड़ रोड,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश 
  शिक्षा एन्क्लेव सहकारी आवास समिति, जीएच -11,सैक्टर नं 6, वसुंधरा गाजियाबाद 
रजिस्ट्रेशन नंबर (1739) दि० वर्ष 1992
भौतिक कब्जा (8097.67) दिनांक 27-11-/1999
भूखंड की कीमत 2,23,04,480/-( दो करोड़ तैइस लाख चार हजार चारसौ अस्सी)
प्लान के अनुसार तीन श्रेणी के बहुमंजिला फ्लैट 
एचआईजी ( 3BHK), MIG ( 2BHK)LIG ( 1BHK)
जैसे: एम आई जी की क़ीमत – 6,50,000/-
          Land Cost –     2,00,000
    Construction cost -4,00,000
Registration+Share  -00,45,100
Money.                    ——————
                                   6,45,100
Paid with extra charge against 6,45,100
                Rs -7,23110.   till 2001,
by Ist owner 
Position – वर्ष 2014। (IInd owner)
Paid to Society –    Rs.  8,62,804  by cheque 
   and  –             –    Rs. 19,12,196 by cheque to.    
                                            +          owner.
उपरोक्त धनराशि में –  समिति के सचिव/अध्यक्ष को 
भूखंड खरीदना, भूखंड रजिस्ट्री व उससे सम्बन्धित सभी औपचारिकताएं पूर्ण करना।
यू०पी० आवास विकास परिषद से नक्शा पास कराना, आर्किटेक्ट हायर करना, बिल्डिंग बनवाना, बाहरी चारदीवारी, गार्ड रूम, पानी के टैंक, बाहरी सड़कें, लिफ्ट, फायर सेफ्टी का कार्य, पम्प सेट रुम, वाटर/सीवर कनैक्शन, बिजली कनेक्शन एवं सम्बंधित विभाग से NOC प्राप्त करके कम्पलीशन प्रमाण-पत्र तक इत्यादि औपचारिकताएं पूर्ण करना सम्मिलित था, आफिस खर्चे इत्यादि भी, जो फाउंडर सचिव श्री आर पी अरोड़ा जी द्वारा समय से अपने कार्यकाल में पूर्ण नहीं कराये गये। जो समिति की मूल जिम्मेदारी थी।
जब इनका कार्यकाल 2008, में समाप्त हुआ, या इन्हें हटाया गया तो उससे पहले AGM करके उन्होंने एक पत्र जारी किया जिसमें वर्ष 2008 में जमा धनराशि का विवरण है (पत्र संलग्न है) जिसमें बताया गया है कि रूपये 52,16,525/- की कुल धनराशि बैंक में जमा है। जिसमें से रूपए 22,33,250/- की धनराशि भूखंड रजिस्ट्री हेतु स्टाम्प शुल्क के लिए सुरक्षित थी और रूपए 31,12,642/- की धनराशि जिन पांच सदस्यों  के फ्लैट निरस्त किए गए थे उनकी जमा धनराशि उनकी रिट याचिका संख्या 20477/2010 माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में विचाराधीन है।
परन्तु महोदय: वर्ष 2008 से 2018 के कार्यकाल में रहें सचिव/अध्यक्ष द्वारा उपरोक्त धनराशि को मेनटेनेंस के खर्चों के फर्जी बिल बनाकर खर्च/हजम कर दिया गया।
इस कार्यकाल में 60-70 फ्लैटों नियम के विरुद्ध खरीद-फरोख्त भी कराई गई। जिसमें यू०पी० आवास से केवल मेम्बरशिप चेंज करने की परमिशन करा कर अंडर टेबल एवं कमीशन के जरिए करोड़ों की कमाई भी की गई। क्योंकि सचिव व अध्यक्ष की कमाई हो रही थी। इसलिए इनका ध्यान सदस्यों को भटकाने में था। जिस पर हम सदस्यों द्वारा की गई शिकायतों के कारण कई जांचें हुई एवं जांच में कार्यवाही के लिए भी स्पष्ट लिखा गया। एवं वर्तमान में भी समिति का विशेष आडिट/जांच चल रही है। पांच निरस्त सदस्यों की याचिका भी माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में चल रही है।
महोदय हम आपका ध्यान इस ओर भी आकर्षित करना चाहते है कि जो फ्लैट हमने वर्ष 2003 में खरीदें उनमें केवल रहने का अधिकार हमारे पास है। उनको ना ही हमारे द्वारा बेचा जा सकता है और ना ही कोई लोन इत्यादि लिया जा सकता है। अगर नियम विरुद्ध इसे बेचना चाहते हैं तो:
इसके लिए हम सदस्यों को अध्यक्ष/सचिव से आग्रह करना होगा उनकी मर्जी होगी तो वह बेचने की परमिशन दे सकते हैं अन्यथा नहीं। इसके लिए उनकी कुछ शर्तें होती है।
ग्राहक यानी खरीदने वाला उनके अनुसार होगा 
रेंट उनके अनुसार तय होंगे।
अंडर टेबल एवं कमीशन उनके हिसाब से देना होगा।
अगर आपको उपरोक्त शर्तें स्वीकार है तो आपको बेचने की अनुमति दी जाएगी वरना नहीं।
इसके बाद यू०पी० आवास विकास परिषद से मेम्बरशिप चेंज कराने हेतु रूपए 50,000/ नगद धनराशि और मांगी जाएगी।
महोदय यह भी ध्यान देने योग्य है कि यू०पी० आवास द्वारा 25 साल के बाद भी ओरिजनल अलौटी की लिस्ट सुरक्षित नहीं रखीं गई है।
कभी भी कुछ लोगों का फ्लैट निरस्त करने का नोटिस जारी कर दिया जाता है।
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अत: हम लोग इनके इतने दबाव में है एवं शोषित है कि हम लोग इनका कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं और हम इनके चंगुल में पूरी तरह से फंसे हुए हैं। हम लोग ना जरूरत पड़ने पर अपना घर बेच नहीं पा रहे हैं। जैसे कि कुछ लोगों को बच्चों की शादी करनी है कुछ लोगों को लोन की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। कुछ लोगों को बाहर शिफ्ट होना है, कुछ लोग बुजुर्ग है जो मरने के कगार पर है। और ये लोग पिछले 25 वर्षों से सदस्यों का शोषण करते आ रहे हैं।
महोदय, हमारे अध्यक्ष सचिव जी से कुछ सवाल है।
आपने 2003 में हम लोगों को भौतिक कब्जा देने के बाद अब तक:
सम्बंधित विभाग से जरूरी प्रमाण-पत्र (NOC) प्राप्त किए।(Air Traffic Control,Fire, Lift, Harvesting, Water/Sewer etc. 39 points required by UPAVP Check list for Completion Certificate)
बचें हुए सम्बंधित कार्य जैसे Harvesting Pits etc.
कम्पलीशन प्रमाण-पत्र (from UPAVP)- यह इसलिए भी आवश्यक है कि समिति द्वारा जो फ्लैट हमें बेचें गए हैं, उनमें से किसी फ्लैट का निर्माण समिति द्वारा अवैध रूप से तो नहीं किया गया है एवं जिस भवन में आप यह रहें हैं, वह सुरक्षा की द्रष्टि से भी सुरक्षित है या आपदा को झेलने के लिए सुरक्षित है।
लीज डीड क्यों नहीं करवाई गई।
यूं पी आवास परिषद द्वारा 25 वर्षों तक भूखंड की रजिस्ट्री हेतु कम्पलीशन प्रमाण-पत्र की औपचारिकता को क्यों लगाएं रखा।
अब 08-08-2025 के पत्र में यू पी आवास विकास परिषद के द्वारा कम्पलीशन की शर्तें को किस नियम के तहत मना किया गया।
जिसकी वजह से भूखंड की लीज डीड के लिए लगने वाले स्टाम्प शुल्क में 18 लाख से चार करोड़ अस्सी लाख रूपये की वृद्धि हो गई इसके लिए समिति पदाधिकारी जिम्मेदार है या यू पी आवास विकास परिषद।
20 वर्षों में 60-70 फ्लैटों की नियम विरुद्ध खरीद फरोख्त क्यों होती रही (जिससे करोड़ों रुपए की राज्य को राजस्व हानि) यदि नियम के तहत हुआ तो उस नियम का हवाला दिया जाए।
जमीन/भूखंड की लीज डीड कराने हेतु स्टाम्प शुल्क का पैसा हम सदस्यों से क्यों  दुबारा मांगा जा रहा है।
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महोदय  हम सदस्य इस पर भी अपनी सहमति देते हैं कि अगर लिखित रूप में हमें यह दिया जाता है कि – वर्तमान मे समिति की मांग के अनुसार HIG, MIG, & LIG से जैसे जैसे जिस धनराशि मांगी जा रही है, समिति भविष्य में इसके अलावा रजिस्ट्री हेतु किसी भी प्रकार की कोई भी धनराशि की मांग इस सम्बन्ध में हम सदस्यों से नहीं करेंगी एवं समिति के अध्यक्ष/सचिव द्वारा नियम के तहत सारी ज़रूरी और अति आवश्यक औपचारिकताओं ( जैसे सभी विभागों से NOC, Completion Certificate) इत्यादि करा कर, एक महीने के अन्दर हम सभी फ्लैट मालिकों को उनकी फ्लैट रजिस्ट्री करा दी जाएंगी। जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी समिति के अध्यक्ष व सचिव श्री वीरेन्द्र प्रताप त्यागी और श्री संजय शर्मा की होगी। वो पूरा कार्य समयबद्ध तरीके से जिलाधिकारी महोदय या उनके द्वारा नामित अधिकारी की देख रेख में कराया जाएगा। 
उपरोक्त धनराशि इन्हीं निर्धारित नियम एवं शर्तों/प्रक्रिया के साथ हम सदस्यों से ली जा सकती है और उस धनराशि को समिति के इसी उद्देश्य से एक अन्य बैंक खाता में परिचालन हो।
अब सवाल है किस पर भरोसा किया जाय किस पर नही? निराश और हताश शिक्षा एनक्लेव के निवासी बस अब एक दूसरे से ही सवाल पूछ रहे हैं आख़िर और कितना पैसा और भरना पड़ेगा ? न्याय कब मिलेगा? निवासी अब प्रशासन से भी ना उम्मीद हो चुके हैं। 
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