तरक़्क़ी किसके नाम? भूख हर एक शाम तक पहुँची, पर न रोटी ही थाल तक पहुँची। सिंहासन चढ़ते रहे चेहरे सब, भूख क्यों नीलाम तक पहुँची। आज रोटियों पर पहरे बैठे, नीति केवल निज़ाम तक. पहुँची। जंगल उगते रहे विकासों के, आग हर एक मकान तक पहुँची। रोशनी बाँटी गई काग़ज़ पर, रात फिर हर […]
