“मैं एक्सीडेंटल व्यंग्यकार हूँ। आरम्भ में व्यंग्य मेरी मुख्य विधा नहीं थी। एक आपातकालीन स्थिति में मित्र मधुसूदन आनंद की मदद करने के आग्रह पर मैंने इस विधा में प्रवेश किया। मुझे दो व्यंग्यकारों में अध्ययनशीलता मिली — एक परसाई और दूसरी रवींद्रनाथ त्यागी में। रवींद्रनाथ त्यागी परिवार के आग्रह पर त्यागी जी की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए के लिए ‘व्यंग्य यात्रा’ प्रशंसनीय काम कर रही है।“ अपने ये उद्गार विष्णु नागर ‘रवींद्रनाथ त्यागी स्मृति व्यंग्य यात्रा शीर्ष सम्मान’ प्राप्त करने के बाद कहे।
नई दिल्ली – 21 मार्च, 2026 – पिछले दिनों नई दिल्ली के हिंदी भवन में व्यंग्य यात्रा सम्मान समारोह-2026 का भव्य आयोजन किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि लीलाधर मंडलोई ने कहा,”जोनाथन स्विफ्ट को पढ़ा था, जो व्यंग्य के जनक थे। छोटी-छोटी बातों को व्यंग्य के माध्यम से सृजित किया। भारतेन्दु की व्यंग्य शैली का चित्रण किया। नाटक, कहानी, कविताओं से सामाजिक परिवेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आजादी से पहले प्रेमचंद के पास और आजादी के बाद हरिशंकर परसाई के पास जाना होगा। परिवर्तन के लिए व्यंग्य का उपयोग करना होगा, जो प्रेम जनमेजय कर रहे हैं। उन्हीं भावनाओं के अनुरूप आपको यह दायित्व दिया है।“
अध्यक्षीय भाषण में प्रेम जनमेजय ने कहा,”मेरे प्रशंसक कहते हैं कि मैं वन मैन आर्मी हूँ। मैंने ये अहंकार कभी नहीं पाला है। आप सबका सहयोग मेरी ताकत, मेरी ऊर्जा और मेरा संबल है। इस सहयोग के कारण मैं कभी अकेला नहीं हूँ। इस सहयोग के बिना मैं कुछ नहीं कर सकता हूँ। यही मेरी पूंजी भी है, पूंजीनिवेश भी। ‘व्यंग्य यात्रा’ का कुनबा प्रतिदिन इस विकास पथ पर सरपट दौड़ रहा है।” सम्मानों की स्थिति पर विवेचनात्मक टीका-टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि “सम्मान स्वयं को मिले तो जेनुइन लगता है और दूसरे को मिले तो जुगाड़। सम्मान कुरुक्षेत्र में सम्मानों का क्रीड़ा व्यापार में अपने अपने युद्ध लड़े जा रहे हैं। हेनरी मिलर के शब्दों में – लेखक के लेखन का मूल्यांकन ही पुरस्कार और पारिश्रमिक है।“
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार रवींद्रनाथ त्यागी की स्मृति में गठित “रवींद्रनाथ त्यागी स्मृति व्यंग्य यात्रा शीर्ष सम्मान” से वरिष्ठ व्यंग्यकार विष्णु नागर को सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप इकतीस हजार रुपए की राशि, स्मृति चिन्ह, बुकमार्क एवं अंग वस्त्र प्रदान किया गया। “रवींद्रनाथ त्यागी स्मृति व्यंग्य यात्रा सोपान सम्मान” से युवा व्यंग्यकार विनोद कुमार विक्की को सम्मानित किया गया। श्री विक्की को वाणी प्रकाशन के सौजन्य से रवींद्रनाथ त्यागी रचनावली का एक सेट भी उपहार स्वरूप भेंट किया गया।
धर्मवीर भारती की स्मृति में गठित “धर्मवीर भारती स्मृति व्यंग्य यात्रा सम्मान” से वरिष्ठ कथाकार-पत्रकार हरीश पाठक को सम्मानित किया गया।
व्यंग्य विमर्श को रेखांकित करने के उद्देश्य से गठित “व्यंग्य यात्रा व्यंग्य चिंतक सम्मान” से डॉ संजीव कुमार एवं डॉ बी एल अच्छा को सम्मानित किया गया।
साहित्य में कला विशेष के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से गठित “व्यंग्य यात्रा शब्दान्वेषी कला भूषण सम्मान” से संदीप राशिनकर को सम्मानित किया गया।
व्यंग्य विधा में नारी स्वर को और प्रखर करने के उद्देश्य से गठित “शारदा त्यागी स्मृति व्यंग्य यात्रा सम्मान” से वरिष्ठ व्यंग्यकार स्नेहलता पाठक को सम्मानित किया गया। स्नेहलता पाठक को डॉ प्रेम जनमेजय द्वारा संपादित और इंडिया नेटबुक्स से प्रकाशित पुस्तक “हिंदी व्यंग्य में नारी स्वर” पुस्तक डॉ मनोरमा कुमार द्वारा भेंट की गई।
विष्णु नागर शीर्ष सम्मान स्वरूप इकतीस हजार रुपए और अन्य सभी साहित्यकारों को पंद्रह हजार रुपए की सम्मान राशि के साथ स्मृति चिन्ह, बुकमार्क और अंग वस्त्र से सम्मानित किया गया।
सभी सम्मानित साहित्यकारों और मंचासिन अतिथियों को अद्विक प्रकाशन की ओर से अशोक गुप्ता द्वारा उपहार स्वरूप पुस्तकें भेंट की गईं।
अपने आरंभिक वक्तव्य में युवा साहित्यकार और रवींद्रनाथ त्यागी सम्मान समारोह समिति के महासचिव रणविजय राव ने सम्मान समारोह की शुरुआत, इसकी परिकल्पना, रवींद्रनाथ त्यागी जी और धर्मवीर भारती जी का साहित्य में योगदान, त्यागी परिवार का सहयोग और अब तक सम्मानित साहित्यकारों के नाम का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि आयोजन का उद्देश्य साहित्यकारों के उल्लेखनीय कार्यों को रेखांकित करना एवं उन्हें सम्मानित कर उन्हें उत्कृष्ट लेखन के लिए प्रोत्साहित करना भी है।
इस अवसर पर रवींद्रनाथ त्यागी की पौत्री पल्लवी ने अपने वक्तव्य में अपने दादाजी की स्मृति को जीवंत किया और उनकी एक छोटी-सी परंतु सार्थक और भावपूर्ण कविता का पाठ भी किया।
इसके उपरांत सभी सम्मानित साहित्यकारों ने संक्षेप में अपने-अपने वक्तव्य दिए और प्रायः सबने अपने वक्तव्य में यह बात कही कि यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त कर गर्व का अनुभव हो रहा है। विष्णु नागर जी ने जहां रवींद्रनाथ त्यागी के उत्कृष्ट लेखन का उल्लेख किया तो हरीश पाठक ने धर्मवीर भारती के योगदान को रेखांकित किया। प्रायः सबने यह कहा कि सम्मान प्राप्त करने के बाद हमारी जिम्मेदारी और बढ़ गई है एवं बेहतर लेखन को प्रेरित हुए हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार ममता कालिया जी अस्वस्थता के कारण कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सकीं, पर उन्होंने फोन पर कार्यक्रम की सफलता की शुभकामनाएं और सभी सम्मानित साहित्यकारों को बधाई दी।
इस मौके पर सार्थक व्यंग्य की रचनात्मक त्रैमासिकी व्यंग्य यात्रा पत्रिका के नए अंक का विशिष्ट अतिथियों द्वारा लोकार्पण भी किया गया।
कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत से पूर्व मंच पर आसीन अतिथियों को तिलक लगाकर स्वागत किया गया। सभी विशिष्ट अतिथियों और सभी सम्मानित साहित्यकारों को तिलक लगाकर स्वागत किया युवा साहित्यकार सोनी लक्ष्मी राव ने।
स्वागत वक्तव्य दिया व्यंग्य यात्रा पत्रिका की प्रबंधक आशा कुंद्रा जी ने। उन्होंने अपने मधुर स्वर में सरस्वती वंदना भी की।
कार्यक्रम का कुशल संचालन युवा साहित्यकार नीरज मिश्र ने किया और धन्यवाद ज्ञापित किया रवींद्रनाथ त्यागी सम्मान समारोह समिति के संरक्षक श्री अशोक त्यागी जी ने।
सभागार में प्रख्यात गांधीवादी कुमार प्रशांत, वरिष्ठ पत्रकार रामशरण जोशी, वरिष्ठ साहित्यकार बलराम, प्रताप सहगल, शशि सहगल, राजकुमार सिंह, आचार्य राजेश कुमार, लालित्य ललित, स्वाती चौधरी, सुरेश चन्द्र शुक्ल, संदीप तोमर, महेश भारद्वाज, राजेन्द्र शर्मा, राजेश झा, प्रदीप, प्रियंका सैनी, अटल तिवारी, मनोरमा कुमार, पंकज सक्सेना, रेणु गुप्ता के साथ-साथ तनिष्का, विशाल ,रंजन, रोहित, दीपक एवं साहित्य, कला, संस्कृति के तमाम दिग्गज और साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।
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*रपट प्रस्तुति — सोनी लक्ष्मी राव*
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