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नई दिल्ली – पिछले दिनों मंगलवार को केंद्र सरकार द्वारा प्रेस कांफ्रेन्स कर केंद्र सरकार ने दिल्ली की जनता को एक बड़ा तोहफा देने का एलान किया है, यह इनाम है, दिल्ली अनधिकृत कॉलोनियों में संपत्तियों के पंजीकरण और निर्माण गतिविधियों के लिए अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए जैसा है जहां है’ आधारित नियमितीकरण नीति की मात्र घोषणा तक सीमित है?
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस नीति की घोषणा को शहरवासियों के लिए एक बड़ा दिन बताते हुए कहा कि संशोधित नीति के तहत संपत्तियों के स्वामित्व के लिए आवेदन 24 अप्रैल से पीएम-उदय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं और इस कदम से ऐसी कॉलोनियों के लगभग 50 लाख निवासियों को लाभ होगा।
ज्ञात हो कि पांच राज्यो में चुनाव होने वाले हैं, और केंद्र सरकार ने ऐसे समय मे दिल्ली की जनता को एक तोहफा रूप में कॉलोनियों को नियमित करने का एलान किया है ताकि इसका असर पांच राज्यो में होने वाले चुनाव में पांच राज्यों की जनता को भाजपा का वोट बैंक तैयार किया जा सके। यह भाजपा सरकार की एक और नई शतरंज की चाल है। ताकि यह दिल्ली में ट्रिपल इंजन की सरकार की उपलब्धियां गिनाया जा सके। एक कड़वा सच यह भी है, जो कालोनियां कांग्रेस के कार्यकाल में पास हुई थी उसका अभी तक विकास नहीं बल्कि आज वह विनाश के कागार पर है।
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बहरहाल मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने राजधानी की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के ऐतिहासिक निर्णय के लिए केंद्र सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया।
मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में आयोजित बैठक में माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी, शहरी विकास मंत्री श्री मनोहर लाल जी सहित केंद्र सरकार के नेतृत्व के प्रति सर्वसम्मति से धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय लाखों परिवारों के जीवन में नई आशा और सम्मान लेकर आया है।
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ₹800 करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है, जिससे इन कॉलोनियों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा और विकास को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनाधिकृत कालोनियां में स्वामित्व अधिकारों के नियमितीकरण के लिए पीएम-उदय (प्रधानमंत्री – दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियां आवास अधिकार योजना) योजना 2019 में शुरू की गई थी, लेकिन इसमें कई तकनीकी दिक्कतें आईं, जिसके कारण एक संशोधित नीति की आवश्यकता पड़ी।
उन्होंने कहा कि 2019 की नीति के तहत लगभग 40,000 संपत्ति विलेख जारी किए गए थे और अब सरलीकृत अनुमोदन प्रक्रिया और 45 दिनों के भीतर विलेख जारी करने की समय सीमा निर्धारित होने से प्रक्रिया में तेजी आएगी। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि ‘जैसा है, जहां है’ के आधार पर बनाई गई नियमितीकरण नीति अनधिकृत कॉलोनियों में स्थित पुरानी इमारतों पर लागू होगी, जबकि नए निर्माणों के लिए दिल्ली नगर निगम द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन करना और उसकी अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
संशोधित नीति के तहत दिल्ली की कुल 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1,511 कॉलोनियों में पहले से निर्मित भवनों के पंजीकरण के लिए एक ‘लेआउट प्लान’ की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा, अब दिल्ली सरकार का राजस्व विभाग स्वामित्व विलेख जारी करेगा, ना कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए)।
भारत मे विकास को गति मील या न मिले परन्तु भाजपा के चुनावी प्रचार में गति ज़रूर मिलेगी, भाजपा का विकास ज़रूर होगा।
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