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उपस्थिति का उपहार- एक जागरूकता सेमिनार

समग्र कल्याण के मार्ग के रूप में माइंडफुलनेस पर प्रकाश डाला गया - अपने आपको कैसे चुस्त-दुरुस्त, ज़िंदा दिल रखें?
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इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में “उपस्थिति का उपहार” सेमिनार में समग्र कल्याण के मार्ग के रूप में माइंडफुलनेस पर प्रकाश डाला गया*

 एस. ज़ेड. मलिक

 नई दिल्ली – पिछले दिनों 11 अप्रैल को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर लोदी रोड पर  *“The Gift of Presence”* नाम से एक सशक्त और ज्ञानवर्धक सेमिनार  आयोजिन किया गया, जिसमें प्रतिष्ठित नेताओं, जाने-माने विद्वानों और सक्रिय प्रतिभागियों को एक मंच पर लाकर, मानसिक स्वास्थ्य और लचीलेपन को बेहतर बनाने में माइंडफुलनेस की परिवर्तनकारी भूमिका पर चर्चा की गई।

इस सेमिनार में जीवन के वर्तमान स्थिति पर—विशेष रूप से युवाओं के बीच—तनाव, चिंता और भावनात्मक असंतुलन की बढ़ती चुनौतियों पर चर्चा की गई,  साथ ही स्पष्टता, एकाग्रता और आंतरिक संतुलन विकसित करने के लिए ‘माइंडफुलनेस’ को एक व्यावहारिक और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण के रूप में प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर सेमिनार में मुख्यातिथि एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित अपने अपने क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाले **पद्मश्री*डॉ. डी.आर. कार्तिकेयन* ने माइंडफुलनेस के व्यापक सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा “नैतिक नेतृत्व और सुशासन की जड़ें गहरी आत्म-जागरूकता और विचारों की स्पष्टता में निहित हैं—ये ऐसे गुण हैं जिन्हें विकसित करने में माइंडफुलनेस सहायक होती है।

वहीं सभा आमंत्रित सभा की अध्यक्षता कर रहे एयर मार्शल नरेश वर्मा ने अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए, कहा “अत्यधिक दबाव वाले माहौल में, शांत और स्थिर बने रहने की क्षमता उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि तकनीकी दक्षता। माइंडफुलनेस (सचेतनता) हमें वह आंतरिक संबल प्रदान करती है।”*

*पद्मश्री* डॉ. डी.आर. कार्तिकेयन और एयर मार्शल नरेश वर्मा यह दोनों नाम ऐसे है जो ईमानदारी और जनसेवा का पर्याय है, जो रक्षा और संस्थागत प्रशासन में अपने योगदान के लिए एक विशिष्ट व्यवस्थापक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने अपने विशाल अनुभव को इस जागरूकता सेमिनार में साझा कर सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया, इन्हों ने इस बात पर अधिक बल दिया कि सच्ची सफलता केवल उपलब्धियों में ही नहीं, बल्कि दबाव के क्षणों में भी शांत, नैतिक और संयमित बने रहने की क्षमता में निहित है।

इस सेमिनार की आयोजक **प्रो. डॉ. चारू शर्मा**—जो माइंडफुलनेस(चिंतामुक्त जीवन) और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि पाने वाली जानी-मानी विशेषज्ञ है और देश विदेश जा कर वहां के जीवन शैली और समाजिक वातवरण पर गहन शोध करके आज अपने उस अनुभव को वर्तमान क्षण के प्रति जागरूकता, भावनाओं को नियंत्रित करने और आत्म-चिंतन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने निर्देशित ध्यान सत्र में ‘प्रेम-करुणा ध्यान’ का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली अनुभव को साझा कर वहां उपस्थित प्रतिभागियों को शांति, करुणा और अपने अंतर्मन से जुड़ाव का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान किया।

ज्ञात हो कि प्रो. डॉ. चारू शर्मा,  दिल्ली विश्वविद्यालय की एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद हैं और माइंडफुलनेस, मानसिक स्वास्थ्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ हैं। भगिनी निवेदिता कॉलेज की पूर्व प्राचार्या, वह प्रतिष्ठित ‘फुलब्राइट एकेडमिक एंड प्रोफेशनल एक्सीलेंस अवार्ड’ की प्राप्तकर्ता हैं और उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेंसिल्वेनिया, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी तथा कोलंबिया यूनिवर्सिटी जैसे विश्व के अग्रणी संस्थानों में व्याख्यान दिए हैं। उनका कार्य माइंडफुलनेस, रचनात्मक अभिव्यक्ति और शिक्षा का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।

बहरहाल – वहीं आमंत्रित अनुभवी **डॉ. सरोज दुबे**—जो एक वरिष्ठ कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, लेखाक जो सचेत जीवन शैली के समर्थक है उन्हने अंतिम सत्रों में सभा को सम्बोधित करते हुए अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने  “दैनिक जीवन में माइंडफुलनेस की क्षमता और लचीलापन विकसित करना और  वर्तमान क्षण के प्रति जागरूकता, भावनाओं को नियंत्रित करने और आत्म-चिंतन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने “अस्तित्व और कर्म का नृत्य”* में, प्रतिभागियों को लगातार भाग-दौड़ भरी गतिविधियों से आगे बढ़कर, अपने रोज़मर्रा के जीवन में जागरूकता विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। चिकित्सा विज्ञान और अपने निजी अनुभवों से मिली सीख को मिलाकर, उन्होंने लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए कर्म और ठहराव के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व पर ज़ोर दिया।

इस सेमिनार का स्वरूप काफी संवादात्मक और अनुभव-आधारित था, जिसमें प्रतिभागियों को चिंतन-मनन वाले अभ्यासों और चर्चाओं में शामिल किया गया। वहां उपस्थित लोग न केवल माइंडफुलनेस (सचेतनता) को सैद्धांतिक रूप से समझ पाए, बल्कि उन्होंने वास्तविक समय में इसके व्यावहारिक लाभों का अनुभव भी किया।

इस सेमिनार में 54 लोगों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने सत्रों की गहराई, स्पष्टता और व्यावहारिक प्रासंगिकता की भरपूर सराहना की। मिले फीडबैक से पता चला कि माइंडफुलनेस के निर्देशित अभ्यास और वास्तविक जीवन में इसके अनुप्रयोग विशेष रूप से प्रभावशाली रहे।

इस कार्यक्रम का समापन एक सशक्त संदेश के साथ हुआ। माइंडफुलनेस, आत्म-जागरूकता और भावनात्मक नियंत्रण—आधुनिक जीवन की जटिलताओं से निपटने और समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक जीवन कौशल हैं।

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