AIIMS में प्रशासनिक निष्पक्षता पर उठते सवाल — डॉ. बिसोई प्रकरण में कुछ अधिकारियों और Nurses Union की भूमिका चर्चा में

AIN/RAGHUNATHA
नई दिल्ली। All India Institute of Medical Sciences एम्स में वरिष्ठ कार्डियक सर्जन डॉ. ए.के. बिसोई से जुड़े विवाद ने अब संस्थान की प्रशासनिक कार्यप्रणाली, निर्णय प्रक्रिया और निष्पक्षता को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सूत्रों और संस्थान से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच यह चर्चा लगातार तेज हो रही है कि जिन आरोपों को प्रारंभिक जांचों में पुष्ट नहीं पाया गया, उसी मामले को बाद में कुछ प्रशासनिक अधिकारियों और Nurses Union के कुछ पदाधिकारियों की कथित सक्रियता के कारण लगातार विवाद का स्वरूप मिलता रहा।
उल्लेखनीय है कि डॉ. ए.के. बिसोई के विरुद्ध प्रस्तुत शिकायतों की जांच AIIMS प्रशासन द्वारा विभिन्न स्तरों पर की गई थी। 09 अक्टूबर 2025 को पूरी हुई प्रारंभिक जांच में डॉ. बिसोई के विरुद्ध कोई आरोप स्थापित नहीं हुआ था। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि Nurses Union के दबाव में उन्हें HOD पद से हटाना उचित प्रतीत नहीं होता, विशेषकर तब जब संबंधित नर्स उनके विभाग में कार्यरत भी नहीं थी।
इसके बावजूद, सूत्रों के अनुसार 10 अक्टूबर 2025 को श्री अंशुल मिश्रा, अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन), तथा श्री निशांत कुमार, उप सचिव, AIIMS द्वारा कुछ नर्सिंग कर्मचारियों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर बैठक किए जाने और मामले को आगे बढ़ाने की कोशिशों के आरोप सामने आए। यही बिंदु अब पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू माना जा रहा है, क्योंकि इससे प्रशासनिक निष्पक्षता और संस्थागत आचरण पर प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2022 में All India Institute of Medical Sciences प्रशासन द्वारा जारी “Code of Conduct” memorandum में स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया था कि किसी भी प्रकार की हड़ताल, नारेबाजी, धरना, समूह बैठक अथवा ऐसी गतिविधियां, जिनसे संस्थान का कार्य या मरीज सेवाएं प्रभावित हों, पूर्णतः प्रतिबंधित रहेंगी। ऐसे में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब प्रशासन की ओर से Nurses Union से संबंधित गतिविधियों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश और प्रतिबंध पहले से लागू थे, तब उन निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के बजाय श्री अंशुल मिश्रा, अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन), तथा श्री निशांत कुमार, उप सचिव, द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर बैठकें कर कथित रूप से Union प्रतिनिधियों के साथ बातचीत और समन्वय करने की आवश्यकता आखिर क्यों महसूस की गई। विशेष रूप से तब, जब प्रारंभिक जांच में आरोप प्रमाणित नहीं हुए थे। इसी कारण अब यह मुद्दा केवल एक शिकायत तक सीमित न रहकर प्रशासनिक निष्पक्षता, निर्णय प्रक्रिया और कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा और सवालों का विषय बनता जा रहा है।
संस्थान से जुड़े कई लोगों का मानना है कि कुछ प्रशासनिक अधिकारियों और Nurses Union के कुछ सदस्यों के बीच कथित समन्वय ने इस विवाद को समय-समय पर और अधिक संवेदनशील तथा उग्र स्वरूप दिया। आरोप यह भी हैं कि इस पूरे घटनाक्रम ने AIIMS जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के भीतर अनावश्यक तनाव और अस्थिरता का वातावरण उत्पन्न किया।
सूत्रों के अनुसार, तत्कालीन Director डॉ. एम. श्रीनिवास को पद से हटाए जाने के बाद इन दोनों अधिकारियों की भूमिका को लेकर चर्चाएं और अधिक तेज हो गई हैं। यह भी बताया जा रहा है कि AIIMS Faculty Association के कुछ सदस्यों द्वारा प्रशासनिक आचरण को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं तथा सार्वजनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने और स्पष्टीकरण की मांग भी उठाई गई थी।
इसी बीच, संस्थान के भीतर यह चर्चा भी व्यापक रूप से सामने आ रही है कि श्री अंशुल मिश्रा को AIIMS में नियुक्ति से पूर्व Madras High Court द्वारा न्यायालय की अवमानना के एक मामले में दोषी ठहराते हुए एक माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई थी। यद्यपि बाद में उन्हें अपील का अवसर प्रदान किया गया, लेकिन अब कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो प्रशासनिक स्तर पर हुई भूमिका और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
हालांकि, अब तक श्री अंशुल मिश्रा, श्री निशांत कुमार अथवा AIIMS प्रशासन की ओर से इन आरोपों और चर्चाओं पर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया है।

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