प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले के निधन,पर गोल्डकिंग चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा शोक सभा का आयोजन
वह सूर कोकिला थी जो संगीत जगत के बगिया को वह मौन कर गयी, जिसे अब स्मरणीय हर वह नारी उन्हें उस समय गुण गुनायेगी - जब चंचल चितवन, पनघट पर या बगिया में वह जाएगी।
।वह सूर कोकिला थी जो संगीत जगत के बगिया को वह मौन कर गयी, जिसे अब स्मरणीय हर वह नारी उन्हें उस समय गुण गुनायेगी – जब चंचल चितवन, पनघट पर या बगिया में वह जाएगी। शीतल सुरीली हवा जब उसके कानों से टकराएगी – उसके केश धागे के कटे हुए गुच्छे से लहरायेंगे, तब कोई चंचल मन स्वर कोकिला की कोई पंक्ति गुण गुनायेगी।।
हम कहां आ गये है-——

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