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यूरोपियन महिलाएं युवतियों में नंगापन शौक़, धर्म, परम्परा, आदत, या मजबूरी?

यूरोपियन महिलाएं अपने आपको सम्भोग विलासिता की वस्तु मान कर उचित दाम देने वाले पुरुषों को मज़े देती हैं, उनसे खेलती हैं और फिर चूस कर छोड़ कर किसी और क्लाइंट को पकड़ लेती हैं।
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एस. ज़ेड. मलिक
जबकि – एक गहन शोध से पता चलता है कि एक महिला संसार की परम्परागत पहली जन्मजात शिक्षिका होती है। बेटी के रूप में जन्म लेती है, बहन बनती है फिर बहु बनती है फिर अंत मे माँ बनती है। परन्तु यह महिलाओं का दुर्भगय है कि महिलायें अपने आपको समझने की कोशिश ही नहीं कर रही हैं। अभिव्यक्ति के आज़ादी नाम पर अपनी मौज-मस्ती, मनमानी  शौक़, प्रतियोगिता, दृढ़तापूर्ण, परुषों की बराबरी करना, यह सभी कृत्यों को अपने अंदर अपना एक अत्यधुनिक गुण बना लिया।  इसी कारण महिलायें एक ओर जहां प्रेरणा हैं वही दूसरी ओर सभ्य समाज के लिए श्राप, और बदनुमा दाग भी!
महिलायें समाज के लिए श्राप उस समय बन जाती हैं जब अपने शौक के लिए अय्याश पूंजीपति पुरुषों से अपने शरीर का सौदा कर के अवैध तरीके से बिना शादी के शारीरिक सम्बन्ध बना कर नाजायज़ बच्चे को जन्म दे कर दृढ़ता से समाज में सीना तान कर रहती हैं। ऐसी महिलाओं के कारण अन्य सभ्य महिलायें जो मजबूरी में कहीं नौकरी कर रही होती हैं या कोई अपना व्यापार कर रही होती हैं या कुछ खरीदारी करने बाज़ार अकेली जा रही होती हैं,  तो अय्याश मनचले पूंजीपति पुरुष उन महिलाओं को भी गलत निगाह से देखते हैं, और उनके साथ अभद्र व्यावहार करते हैं ऐसे पुरुष महिलाओं को एक खिलौना की तरह इस्तेमाल करते हैं। विशेष कर यह परम्पराएं यूरोप में ही आम है।
अब सवाल है – यूरोपियों महिलाएं कब तक अपने आपको अय्याश पूंजीपति पुरुषों की खिलौना बनाएं रखेंगी? क्या यूरोपियन महिलाओं सड़को पर बाजारों में समुंदर किनारे नंगा शरीर दिखाना धर्म है परम्परा है शौक़ है या मजबूरी?  क्या यूरोपियन महिलाये कभी सच बोलती हैं?
जानवरों की तरह चलते फिरते मुस्टंडे सांढ़ से जहां मन मे आया वही सम्भोग करा लिया, बच्चे ठहर गया तो कोई बात नहीं उसे पैदा कर लिया, चाइल्ड केअर होम डाल दिया, बच्चा तो सरकार पाल पोस कर अपने काम मे ले ही लेती है, जब तक जवानी रहती है महिलाएं  मौज मस्ती करती रहती हैं और जब उम्र गिर जाती है तो न कोई यूरोपियन युवा वृद्ध महिलाओं को पूछते है और न उन वृद्ध महिलाओं को कोई जवान वृद्ध ही मिलते ही मिलते है, यूरोप के युवा जब अधवैस और वृद्ध महिलाओं को ठुकरा देते हैं तो वैसी अपने आपको सोशल मीडिया पर दूसरे देशों के युवाओं को लालच दे कर अपनी सेवा करवाने के लिए ड्रामा करती हो। और शोशल मीडिया अपनी टी TRP और फॉलोवर बढ़ाने के लिए तरह तरह लुभावने स्क्रिप्ट तैयार कर बोलती रहती हैं। उससे क्या हासिल होगा?
आवारे बदचलन महिलाओं ने पूरे यूरोप देश को बदनाम कर दिया,  हर यूरोपियों को सोंचना चाहिए इस इस मुद्दे पर एक गहन समीक्षा और मंथन होना चाहिए ताकि नस्लें बर्बाद न हो – हराम की नस्ले समाज और देश दोनो को बर्बाद कर देते हैं, वे कभी संवारने की कोशिश नहीं करेंगे बल्कि अपने अय्याशी के लिए हमेशा लूटने का प्रयासरत रहेंगे।
मेरी एक बात गांठ बांध लो – अल्लाह ने इंसानों  को अशरफुल मक़लूक़ात का रुतबा दिया है – और औरत को समाज का ज़ेवर, जवाहरात, धन बनाया है – जैसे धन , ज़ेवर, जेवरात को व्यक्ति  छुपा कर रखता है और किसी इवेंट पर किसी प्रोग्राम में समाज मे अपनी इज़्ज़त बढाने के लिए उस आभूषण को अपने शरीर पर सजा कर निकलता है अपने आपको सुंदर दिखने के लिए अच्छे वस्त्र पहना है दिखावे के लिए और  उस धन की हिफाज़त की जाती है, ताकि फिर से वह सजाने में काम आए – लेकिन अफ़सोस है कि यूरोप की महिलाएं, युवतियां, अपने आपको न आभूषण समझती हैं न धन,, वे अपने आपको चलती फिरती बोलती, इठलाती नंगा खिलौना पुरुषों को खेलने तुल्य बन कर बाज़ार में समुंदर किनारे, बार मे, और रेस्टुरेंट में, उनके सम्भोग की वस्तु बन गयी हैं। यूरोपियन महिलाएं अपने आपको सम्भोग विलासिता की वस्तु मान कर उचित दाम देने वाले पुरुषों को मज़े देती हैं, उनसे खेलती हैं और फिर चूस कर छोड़ कर किसी और क्लाइंट को पकड़ लेती हैं।  जो पुरुष अपने औक़ात के अनुकूल खरीदारी करता है इस्तेमाल करता है उससे अपना मन भर लेने का बाद कोई छोड़ देता है तो कोई बेच देता है, तो कोई फेंक देता है। ज़रा सोंचो फिर उस महिलाओं की ज़िंदगी नरक से बदतर बन कर रह जाती है।
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