चुनौतियों से परिपूर्ण मिस यूनिवर्स महिला सशक्तिकरण का एक प्रेरणादायक प्रतीक है।

मिस यूनिवर्स बनने के लिए अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं के दौरान यौन उत्पीड़न से लेकर महिलाओं के लिए उपलब्ध कानूनी उपाय, डेटिंग ऐप्स से जुड़ी नकल और चुनौतियां, घरेलू हिंसा, कानूनों में आवश्यक बदलाव और कानून के कार्यान्वयन में उत्पन्न होने वाली विभिन्न चुनौतियां का सामना करना पड़ता – प्रतियोगी आत्मविश्वास और सशक्तीकरण के राजदूत हैं, और उन्हें यह ज्ञान अपने साथ रखना चाहिए, चाहे वे कहीं भी जाएं, और इसका उपयोग दूसरों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने के लिए करें – अधिवक्ता सुश्री रावी बीरबल
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सुंदरता प्रतियोगिता की असली ताकत केवल मंच पर चलने वाले कदमों में नहीं, बल्कि उन विचारों में होती है जो प्रतिभागियों के भीतर आत्मविश्वास, जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी जगाते हैं। मिस यूनिवर्स दिल्ली और हरियाणा ने इस बार उसी दिशा में एक सार्थक पहल की, जब महिला सशक्तीकरण को केवल नारे तक सीमित रखने के बजाय उसे ज्ञान और व्यवहार से जोड़ा गया।
इसी सोच के तहत भारत के सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय की अधिवक्ता सुश्री रावी बीरबल को POSH अधिनियम, 2013 और अन्य महत्वपूर्ण लैंगिक कानूनों पर एक विशेष सत्र के लिए आमंत्रित किया गया। यह सत्र केवल कानूनी जानकारी साझा करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने प्रतियोगियों को उन सवालों पर सोचने के लिए प्रेरित किया जो आज की महिलाओं के वास्तविक जीवन से जुड़े हैं।
नवसामा नेक्सस के श्री त्रिशूल कोली के अनुसार, मंच का उद्देश्य प्रतिभागियों को सौंदर्य प्रतियोगिता की सीमाओं से आगे ले जाकर उन्हें ऐसा ज्ञान देना है, जो जीवन भर उनके काम आए। उनके लिए यह केवल ताज की तैयारी नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, समझ और जिम्मेदारी के निर्माण की प्रक्रिया है। इसी कारण मंच ने ऐसी महिलाओं को चुना जो सिर्फ आत्मविश्वास से बोल ही नहीं सकतीं, बल्कि अपने कार्यों से भी समाज में सकारात्मक प्रभाव छोड़ सकें।
सुश्री रावी बीरबल का सत्र इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाता हुआ दिखाई दिया। उन्होंने POSH अधिनियम और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों को सरल, व्यावहारिक और संवादात्मक अंदाज में समझाया। बातचीत के दौरान प्रतियोगियों ने कई गंभीर और समकालीन मुद्दे उठाए, जिनमें अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान यौन उत्पीड़न से सुरक्षा, महिलाओं के लिए उपलब्ध कानूनी उपाय, डेटिंग ऐप्स से जुड़ी नकल और चुनौतियां, घरेलू हिंसा, कानूनों में आवश्यक बदलाव और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की बाधाएं शामिल थीं।
सत्र की सबसे खास बात उसका खुला और संवादपूर्ण स्वरूप रहा। यहां सवाल केवल औपचारिकता नहीं थे, बल्कि वे जमीनी हकीकत से जुड़े थे। प्रतियोगियों ने न सिर्फ ध्यानपूर्वक सुना, बल्कि ऐसे प्रश्न पूछे जो उनके भीतर बढ़ती समझ और जिम्मेदारी का संकेत देते थे। यही वह क्षण था जब प्रतियोगिता एक प्रशिक्षण मंच से आगे बढ़कर एक जागरूकता मंच बन गई।
सत्र के बाद प्रतिभागियों में एक अलग तरह का आत्मविश्वास दिखा। वे सिर्फ मंच पर प्रस्तुत होने वाली प्रतियोगी नहीं रहीं, बल्कि अपने अधिकारों, कर्तव्यों और सामाजिक भूमिका को समझने वाली युवा महिलाएं बनकर उभरीं। यह अनुभव उन्हें केवल प्रतियोगिता के लिए नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र के लिए अधिक सक्षम बनाता है।
श्री त्रिशूल कोली ने कहा कि ऐसे सत्र महिलाओं को मजबूत नेता, पेशेवर और रोल मॉडल बनने में मदद करते हैं। वहीं सुश्री रावी बीरबल ने भी इस विचार को आगे बढ़ाते हुए कहा कि प्रतियोगी आत्मविश्वास और सशक्तीकरण की राजदूत हैं, और उन्हें यह ज्ञान हर जगह अपने साथ लेकर चलना चाहिए। उनके अनुसार, इस समझ का सबसे बड़ा मूल्य यही है कि यह न केवल खुद को, बल्कि दूसरों को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करने की शक्ति देती है।
यह पहल इस बात का संकेत है कि आधुनिक सौंदर्य प्रतियोगिताएं अब केवल बाहरी आकर्षण का मंच नहीं रहीं। वे अब विचार, संवेदनशीलता और नेतृत्व के विकास का भी माध्यम बन रही हैं। और जब मंच पर खड़ी कोई महिला कानून को समझती है, अपने अधिकारों को पहचानती है और समाज के लिए जिम्मेदारी महसूस करती है, तब वह केवल प्रतियोगी नहीं रहती — वह परिवर्तन की आवाज बन जाती है।
जैसा कि पहले भी बताया गया है, ग्लामानंद ग्रुप ने मिस यूनिवर्स इंडिया के फ्रेंचाइजी अधिकार हासिल किए हैं, और ऐसे प्रयास इस मंच को एक नए, अधिक अर्थपूर्ण रूप में स्थापित कर रहे हैं।
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