अपने आपको दलित पिछड़े कहलवाने वालों एक ध्यानपूर्वक संविधान पर मंथन करो इसी संविधान ने दलितों पिछड़ों के अधिकार को दर्शाया और शक्ति दिया लेकिन इसी संविधान ने दलितों पिछड़ों के अधिकार को संविधान से दलितों पिछड़ों की शक्ति को छीनने का प्रावधान भी दे दिया है यही संविधान तुम्हारे सारे शक्ति को मात्र एक आर्टिकल ने शक्तिहीन बना दिया है आज भाजपा उसी का लाभ ले रही है यह बुद्धि भी कांग्रेस ने ही पहली बार संविधान संशोधन कर के दलितों पिछड़ों को आरक्षण दे कर लामबंद कर दिया और मुस्लिम , क्रिश्चन, सिख, पारसी, बौद्ध और जैन को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया। यह क्यों हुआ – यह गलती किसकी है ऐसी आर्टिकल किसने और क्यों संविधान में लागू किया करवाया – एक बार इस पर मंथन करो सिर्फ एक बार 🙏🙏🙏
भारत के संविधान में संसद को संविधान संशोधन का अधिकार मुख्य रूप से अनुच्छेद 368 के तहत दिया गया है।
संक्षेप में:
अनुच्छेद 368 संसद को संविधान में संशोधन (Amendment) करने की प्रक्रिया और शक्ति प्रदान करता है।
अधिकांश संशोधनों के लिए दोनों सदनों में:
कुल सदस्य संख्या के बहुमत (absolute majority) तथा
उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत (special majority) की आवश्यकता होती है।
कुछ विशेष प्रावधानों (जैसे संघ-राज्य संबंध, राष्ट्रपति के चुनाव, उच्च न्यायालय/सर्वोच्च न्यायालय से जुड़े कुछ विषय आदि) में संसद से पारित होने के बाद कम-से-कम आधे राज्यों की विधानसभाओं द्वारा अनुमोदन भी आवश्यक होता है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि संसद का संशोधन करने का अधिकार असीमित नहीं है। केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य में भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि संसद संविधान में संशोधन तो कर सकती है, लेकिन संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) को नष्ट या समाप्त नहीं कर सकती।
अतः आपके प्रश्न का सीधा उत्तर है: संविधान का अनुच्छेद 368 संसद को संविधान संशोधन की शक्ति प्रदान करता है।
आखिर संविधान में संशोधन का आर्टिकल 368 संविधान में अंकित करने की क्या आवश्यता थी – क्या यह बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर ने यह आर्टिकल संविधान में अंकित किया या संविधान समिति के सदस्यों ने? यदि संविधान समिति के सदस्यों ने यह आर्टिकल डालने दवाब बना रहे तो बाबा साहब ने इसका विरोद क्यूँ नहीं किया? जब कि बाबा साहेब अंबेडकर दलितों पिछड़ों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के हित में संविधान बनाया तो दलितों पिछड़ों आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के अधिकार को छिनने वाल आर्टिकल संविधान में क्यूँ अंकित करना पड़ा????

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