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 मणिपुर में बढ़ती हिंसा पर भारत सरकार मौन क्यूँ?

मणिपुर में पिछले पिछले डेढ़ सालों से बढ़ती हिंसा और केंद्र सरकार द्वारा मौन धारणा तथा मीडिया द्वारा सच्चाई को छुपाना क्या सरकार मणिपुर की आबादी को समाप्त कर देना चाहती? भारत सरकार अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे - जमात ए इस्लामी हिन्द।
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 मणिपुर में बढ़ती हिंसा पर जमात ए इस्लामी  गहरी चिंता व्यक्त करते हुये सरकार की जवाबदेही तय करने और नागरी सुरक्षा की मांग की!

एआईएन/संवादाता

नई दिल्ली, 21 अप्रैल 2026 – जमाअत-ए इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने मणिपुर में दोबारा हिंसा बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हाल की घटनाएँ एक गंभीर मानवीय और नागरिक स्वतंत्रता संकट को दर्शाती हैं। अधिकारियों द्वारा तत्काल और जवाबदेह हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

मीडिया को जारी एक बयान में प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा, “अपने ही घर में दो छोटे बच्चों की दुखद हत्या, साथ ही विरोध प्रदर्शनों के दौरान आम नागरिकों की मौतें एवं अलग-अलग घटनाओं में नागरिकों व एक सुरक्षाकर्मी की हत्या  विचलित करने वाली हैं और मासूम जिंदगियों की रक्षा करने में हुई गंभीर विफलता को दर्शाती हैं। ऐसी घटनाओं की बिना किसी किंतु-परंतु के कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए, चाहे इसके लिए कोई भी ज़िम्मेदार क्यों न हो।” सुरक्षाकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जानलेवा बल के इस्तेमाल की जो खबरें आई हैं वे स्थापित मानदंडों के पालन और उसकी आनुपातिकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। यह अत्यंत आवश्यक है कि सभी घटनाओं—जिनमें शुरुआती हमला और उसके बाद की गोलीबारी शामिल है—की एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और समय सीमा के भीतर जांच की जाए, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो और जनता का विश्वास बहाल हो सके।”

प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा,”इस संघर्ष के विस्तार में मैतेई, कूकी-ज़ो और नागा समुदायों का शामिल हो जाना एक खतरनाक स्थिति है, और यह बातचीत तथा भरोसे के टूटने का संकेत देता है। कर्फ्यू का लगातार उपयोग और इंटरनेट सेवाओं का निलंबन—भले ही इनका उद्देश्य सुरक्षा उपाय के तौर पर हो—नागरिक स्वतंत्रताओं पर गहरा असर डालते हैं; इनमें सूचना तक पहुँच और ज़मीनी स्तर पर हो रहे घटनाक्रमों को स्वतंत्र रूप से दर्ज करने की क्षमता भी शामिल है। इस बात की भी चिंता है कि जाँच में देरी और दोषियों की पहचान करने में किसी भी स्पष्ट प्रगति का अभाव जनता के गुस्से और अविश्वास को और गहरा कर सकता है। नागरिक क्षेत्रों का बढ़ता सैन्यीकरण—जिसमें घनी आबादी वाले इलाकों में भारी हथियारों के इस्तेमाल और सशस्त्र जवाबी कार्रवाई शामिल हैं—ने आम नागरिकों को और भी अधिक असुरक्षित और खतरे में डाल दिया है।”

जमाअत के उपाध्यक्ष ने कहा,”यह स्थिति उन गहरी ढांचागत समस्याओं को भी दर्शाती है, जो 2023 में हिंसा भड़कने के बाद से अब तक अनसुलझी हैं। इस हिंसा के कारण पहले ही बड़ी संख्या में लोगों की जानें जा चुकी है और हज़ारों लोग विस्थापित हो चुके हैं। संघर्ष का विस्तार, और साथ हीसमुदायों के बीच परस्पर विरोधी बातें और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप,ध्रुवीकरण और अस्थिरता को और बढ़ाने काजोखिम पैदा करते हैं। यह ज़रूरी है कि किसी भी समुदाय पर सामूहिक रूप से दोष न लगाया जाए, क्योंकि ऐसी प्रवृत्तियाँ केवल तनाव को बढ़ाती हैं। सरकार को सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और निष्पक्ष तथा तटस्थ तरीके से कानून के शासन को बनाए रखने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा,”मणिपुर की स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बालों के अतिरिक्त समाज मे एक दूसरे के प्रति विश्वास बहाल करने की ज़्यादा ज़रूरत है। इसके लिए सौहार्दपूर्ण एक सकारात्मक दृष्टिकोण की तत्काल आवश्यकता है जिसमें विश्वसनीय जाँच, हिंसा की सभी घटनाओं के लिए जवाबदेही तय करना, नागरिक स्वतंत्रताओं की बहाली, और वहां के अन्य समुदाय के  प्रतिनिधियों के साथ सार्थक संवाद शामिल हो। स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए बातचीत, सुलह और विश्वास-बहाली के उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जमाअत -ए-इस्लामी हिंद अधिकारियों से आग्रह करती है कि वे पारदर्शिता सुनिश्चित करें, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करें और शांति व सामान्य स्थिति की बहाली की दिशा में ठोस कदम उठाएं। स्थायी शांति केवल न्याय, जवाबदेही तथा मानवीय गरिमा और नागरिक स्वतंत्रताओं के सम्मान के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकती है।”

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